Tuesday, May 3, 2011

संस्कार जीवन में संघर्ष करने पर ही सृजित होते हैं निषंक

देहरादून 03 मई, 2011
मुख्यमंत्री डाॅ. रमेष पोखरियाल निषंक मंगलवार को बंसत विहार में श्री चमन लाल प्रद्योत के 76वें जन्म दिवस पर आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने इस अवसर पर श्री प्रद्योत द्वारा रचित पुस्तक ‘मंथन के क्षण’ तथा डाॅ. नागेन्द्र ध्यानी ‘अरुण’ द्वारा श्री प्रद्योत के साहित्यिक जीवन पर लिखित पुस्तक ‘कवि प्रद्योत की काव्य कला का शास्त्रीय अध्ययन’ का विमोचन किया तथा श्री प्रद्योत को उनके 76वें जन्मदिवस की बधाई दी।इस अवसर पर मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने कहा कि श्री प्रद्योत द्वारा साहित्यिक क्षेत्र में किये गये कार्य सराहनीय है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र है। उन्होंने कहा कि जीवन के महत्वपूर्ण विषयों को पुस्तक के माध्यम से चिन्हित किया गया है, जिनका अपना अलग महत्व है। मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने कहा कि जीवन को बदलने के लिये एक शब्द ही बहुत है। उन्होंने कहा कि संस्कार जीवन में संघर्ष करने पर ही सृजित होते हैं और जीवन को तभी वास्तव में समझा जा सकता है। उन्होंने मनुष्य को ईष्वर की श्रेष्ठतम कृति बताते हुये कहा कि जीवन को संघर्षमय व कर्मषील बनाते हुये जीना चाहिए न कि अकर्मण्य रह कर इसे ढोना चाहिए। उन्होंने जीवन की सार्थकता तथा पुस्तक के कुछ अंषो की व्याख्या प्रस्तुत करते हुये कहा कि पुस्तक भावी पीढ़ी के लिये मार्गदर्षक व प्रेरणास्पद होगी।इससे पूर्व साहित्यिक गोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर खेल मंत्री खजान दास ने किया। साहित्यक गोष्ठी में पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी, डाॅ. सविता मोहन, डाॅ. बुद्धिनाथ मिश्र, डाॅ. नागेन्द्र ध्यानी, मदन मोहन ढुकलाण, राम प्रताप साकेती, डाॅ. मुनिराम सकलानी, श्रीमती जसपाल कौर, श्रीमती वीणा पाणी जोषी, पुस्तक के प्रकाषक कीर्ति नवानी, दायित्वधारी मोहम्मद कादिर हुसैन, आदित्य कोठारी, अपर सचिव अजय प्रद्योत, महानिदेषक सूचना सुबर्द्धन आदि उपस्थित थे।

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