Friday, May 20, 2011

सरकारी कैन्टीनो में महकेगी लोकव्यंजनो की खुशबु

सरकारी कैन्टीनो में महकेगी लोकव्यंजनो की खुशबु।मंडुए की रोटी, भट्ट की चुड़कानी, झंगोरे की खीर भी होगी उपलब्ध।

देहरादून। नारायण परगांई। उŸाराखण्ड के लोक व्यंजनों की खुशबु अब सरकारी कैन्टीनो में नजर आएगी। यह उŸाराखण्ड में पहली बार होगा जब लोक व्यंजनो का लजीज स्वाद जनता चटकारे के साथ इन कैन्टीनों में ले सकेगी। इस योजना को मिड में दिए जाने वाले बच्चों के भोजन में भी लागू किए जाने की बातें सामने आ रही हैं और यह यदि मिड डे की बजाए लोक व्यंजनों को बच्चों के बीच परोसा गया तो जहां रोजगार के नए आयाम खुलेंगे वहीं इसका प्रचार प्रसार भी तेजी से हो सकेगा। लोक व्यंजनो की खुशबु वर्तमान में लगने वाले मेलों में देखने को देखने को मिलती थी जिसे बड़ी संख्या में लोगो द्वारा पसंद किया जाता था। इसके साथ ही पहाड़ी व्यंजनो का स्वाद फीका ना पड़ जाए इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने निर्देश जारी कर सभी सरकारी कैन्टीनो में लोकव्यंजनो को प्रमुखता से बनाने के निदेश संबन्धित अधिकारियो को दिए हैं। इसके साथ ही खान पान पर विशेष सावधानी बरतते हुए शुद्ध भोजन जनता को उपलब्ध कराने की बात भी कही है। अब तक लोकव्यंजनो का स्वाद पहाड़ी क्षेत्रों में तो शादी या अन्य समारोह में उपलब्ध हो जाता था और इन व्यंजनो का स्वाद सिर्फ पहाड़ तक ही सिमटा हुआ था जिस कारण लोक व्ंयजनो का स्वाद प्रदेश की जनता भरपूर तरीके से नही ले पा रही थी। घर पर बनाए जाने वाले लोक व्यंजन अब यदि आपको सरकारी कैन्टीनो मे मिलते हुए दिखे तो चैंकिएगा नही क्योकि प्रदेश सरकार ने अब कुमाउ व गढ़वाल के लोकव्यंजनो को सरकारी कैन्टीनो में उपलब्ध कराने का फरमान जारी कर दिया है। इसके साथ ही स्कूलो में मिड डे योजना के तहत स्कूली बच्चो को दिया जाने वाला भोजन बेहद खराब आंका जा रहा है जिसकी गम्भीरता को देखते हुए इन स्कूलो में स्कूली बच्चो को लोक व्यंजनो का स्वाद उपलब्ध कराने की बाते भी उठने लगी हैं। कुछ समय पूर्व स्कूलो में खाना बनाए जाने को लेकर विवाद की स्थिति भी उठ खड़ी हुई थी जिससे बच्चो को भारी परेशानियो का सामना करना पड़ा था लेकिन अब स्क्ूली बच्चो को लोक व्ंयजनो का स्वाद मिलने लगेगा तो इससे पहाड़ी व्यंजन और अधिक प्रचारित भी हो सकेगे। कुमाउ में बनाए जाने वाले लोकव्यंजनो में मंडुए की रोटी, भट्ट की चुड़कानी, डुपका, झोली, के साथ साथ गढ़वाल में झंगोरे की खीर, दालो की चैसनी, स्वाली, अरसा, थिचुड़ी, कनाली की सब्जी के साथ साथ अन्य व्यंजन अब आपको सरकारी कैन्टीनो में खाने को मिल सकेंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सरकारी अमला भी अब कैन्टीनो में उपलब्ध होने वाले खाने पर विशेष नजर रखेगा और यदि सरकारी कैन्टीनो में लोकव्यंजन नही मिले तो उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही भी की जा सकती ळै। इस व्यवस्था से जहां उŸाराखण्ड के लोक व्यंजन बनाने वाले लोगो को रोजगार मिलेगा वही लोकव्यंजनों की खुशबु से सरकारी कैन्टीने महक उठेंगी। इस योजना के लागू होने के बाद अब कोई भी उŸाराखण्डी अपने लोक व्यंजनों को खाए बिना नही रह सकेगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री जल्द ही कई ऐसी योजनाओ को भी लागू कर सकते हैं जो जनता का दिल जीत सकती हैं।

Thursday, May 12, 2011

सीएम हैलीकाॅप्टर पहुंचेगा अटल आदर्ष ग्राम।

अन्त्योदय विकास यात्रा को भाजपा हाईकमान ने सराहा।
देहरादून। नारायण परगांई। देषभर में जहां भ्रश्टाचार को लेकर कई संगठन विरोध का बिगुल बजा चुके हैं ऐसे में मुख्यमंत्रियों के दिल्ली में हुए दो दिवसीय सम्मेलन में भ्रश्टाचार मुक्त देष बनाने के साथ साथ आगामी होने वाले विधान सभा चुनाव में संगठन व सरकार किस तरह मिलकर काम करें इसे लेकर गहन चिंतन मनन किया गया है। इतना ही नही भाजपा के राश्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने साफ किया ळै कि जनाधार रखने वाले नेता दिल्ली के बजाए अपने अपने क्षेत्रो में मतदाताओ ं केबीच अपनी पकड़ मजबूत बनाएं। इससे साफ हो गया है कि कई राज्यों के ऐसे नेता जिनका जनाधार जनता के बीच मजबूत नही है वह राश्ट्रीय अध्यक्ष गडकरी के दरबार में अपनी अर्जी लगाकर टिकट की मजबूत दावेदारी करने में लगे हुए है। लेकिन गडकरी के यह कहने के बाद अब ऐसे नेता घबरा गए है जो दिल्ली दरबार के चक्कर लगातार लगाए हुए थे। दो दिवसीय सम्मेलन में जहां भाजपा षासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ साथ भाजपा प्रदेष अध्यक्षों ने अपने अपने स्तर से अपने रिपोर्ट कार्ड पार्टी हाईकमान के सामने पेष किए और आगामी विधानसभा चुनाव के राजनैतिक गुर भी हाईकमान के नेताओ से सीखें हैं उससे एक बार फिर सभी में नया उत्साह जागृत हो गया है। हाईकमान ने दो दिवसीस सम्मेलन में जहां संगठन स्तर पर समीक्षा की गई वहीं कई राज्यों में चल रही भाजपा सरकार के विकास कार्यो का भी बारीकी से परीक्षण किया है। भाजपा के दो दिवसीय सम्मेलन से जहां भाजपा षासित राज्यों के मुख्यमंत्री व प्रदेष संगठन में नई जान फूंकी गई है वही सरकारो के विकास कार्यो पर अधिक ध्यान देने की जरूरत भी महसूस की गई है इसके अलावा केन्द्र सरकार के भ्रश्टाचारों को प्रमुख मुद्दा विधान सभा चुनाव में बनाने का खाका भी तैयार किया गया है। आगामी विधान सभा चुनाव में भ्रश्टाचार व विकास एक बड़ा मुद्दा उभर कर सामने आ सकता है। मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड में डा.रमेष पोखरियाल निषंक की अन्त्योदय विकास यात्रा की जहां भरपूर प्रषंसा की है वहीं भाजपा के अंदरूनी सर्वे में भी यह यात्रा बेहद सफल साबित हुई है। अब इस यात्रा को देष के अन्य राज्यो में भी लागू किए जाने पर मंथन षुरू हो गया है। इसके साथ ही भाजपा हाईकमान ने उत्तराखण्ड में भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे अटल आदर्ष ग्राम व अटल खाद्यान योजना पर विषेश ध्यान देने की जरूरत महसूस की गई है। उत्तराखण्ड में 670 न्याय पंचायत स्तर पर अटल आदर्ष ग्रामों की स्थापना की गई है और अब इन ग्रामों में अब तक किए गए कार्यो का पूरा विवरण सरकार के माध्यम से मंगा लिया गया है और अब किसी भी जनपद में प्रदेष के मुख्यमंत्री का हैलीकाॅप्टर अटल आदर्ष ग्राम का निरीक्षण करने पहुच सकता है। कुल मिलाकर अन्त्योदय विकास यात्रा को प्रषंसा मिलने के बाद पदेष के मुख्यमंत्री डा. निषंक का कद एक बार फिर हाईकमान के सामने उंचा हो गया है। इसलिए अब मुख्यमंत्री डा. निषंक का अगला पड़ाव अटल आदर्ष गांव की ओर हो सकता है क्योकि हाईकमान ने भी अटल खाद्यान याजना के साथ साथ अटल आदर्ष ग्राम पर विषेश ध्यान देने की जरूरत महसूस की है इसलिए माना जा रहा है कि प्रदेष के मुख्यमंत्री आने वाले दिनो में इन दोनो योजनाओ मे जुडे़ कुछ अधिकारियो पर लापरवाही मिलने पर गाज भी गिरा सकते हैं।

Saturday, May 7, 2011

पर्यावरण को संजोकर रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।निषंक’

देहरादून 07 मई, 2011 शनिवार को देहरादून के मंथन सभागार में ‘‘स्टेट एक्षन प्लान आॅन क्लाइमेंट चेंज (ै।च्ब्ब्) उत्तराखण्ड’’ विषय पर आयोजित कार्यषाला को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डाॅ. रमेष पोखरियाल ‘निषंक’ ने कहा कि पर्यावरण को संजोकर रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि नदियों का अविरल प्रवाह बना रहे। सरस्वती नदी विलुप्त हो चुकी है और अन्य नदियों का हस्र भी यही न हो, इसके लिए समेकित प्रयासों की आवष्यकता है। जल स्रोतों को बचाना और भी आवष्यक है, ताकि जल संकट की गंभीर समस्या का सामना किया जा सके। प्राकृतिक वातावरण के असन्तुलन से पर्यावरण की समस्या उत्पन्न हो रही है। प्रकृति के असंन्तुलन को दूर करना है। विष्व को भी हम इस ओर प्रेरित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण बचाने व प्रकृति के मौलिक स्वरूप को बचाये रखने के लिये ठोस योजना बनाये जाने तथा कारगर नीति बनाने की आवष्यकता है। इस ओर वैज्ञानिकों को सोचना होगा। मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रतिवर्ष करोड़ों की संख्या में पर्यटक, तीर्थयात्री और श्रद्धालु आते है, ऐसे में उत्तराखण्ड के शुद्ध पर्यावरण को बचाये रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। फिर भी राज्य सरकार अपने संसाधनों से इस दिषा में कार्य कर ही है। राज्य में आने वाले पर्यटकों को जागरूक किया जा रहा कि वे प्राकृतिक स्थलों पर कूड़ा न फैलायें। तीर्थ स्थलों पर प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके साथ ही हमने नक्षत्र वन वाटिका जैसी अभिनव योजना शुरू की है। जिसका मुख्य उद्देष्य प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण को बचाना है। इस योजना में ग्रह अनुसार प्रत्येक व्यक्ति द्वारा पौधारोपण करने से प्रकृति की बड़ी सेवा होगी।
मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचने के लिए मिलकर कार्य करने की आवष्यकता है। हमारी प्राकृतिक विषमता उच्च, मध्य, तराई में अलग-अलग स्थिति में इसके लिये अलग-अलग कार्ययोजना बनाने की आवष्यकता है। पृथ्वी में असमानता बढ़ रही है। ग्लेषियर संकट में है, जो निरंतर पीछे जा रहे हैं। अतिवृष्टि व सुनामी से तबाही हो रही है। इस पर विचार करने की जरूरत है। प्रकृति व प्रवृत्ति का समन्वय न होने से प्राकृतिक विषमता का संकट बढ़ा है। प्रकृति में विकृति पैदा हुई है। प्रकृति की विकृति को रोकने के लिये कार्य योजना बनाने की आवष्यकता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यषाला में आये विषेषज्ञों द्वारा उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में हो रहे जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव आयेंगे। उन्होंने कहा कि विष्व प्रकृति निधि-भारत (ॅॅथ्.प्छक्प्।) द्वारा किये जा रहे कार्य सराहनीय है और इसमें राज्य सरकार पूरा सहयोग करेगी।
कार्यषाला में मुख्य सचिव सुभाष कुमार, प्रमुख वन संरक्षक डाॅ. आर.बी.एस.रावत, हेमवती नंदन गढ़वाल केन्द्रीय विष्वविद्यालय कुलपति प्रो. एस.के.सिंह, अपर प्रमुख वन संरक्षक जय राज, प्रो. आर.सी.शर्मा, ॅॅथ्.प्छक्प्। के क्षेत्रीय प्रमुख सुश्री अर्चना चटर्जी, डाॅ. सेजल वोराह आदि उपस्थित थे।

श्रद्धांजलि अर्पित की।

देहरादून 07 मई, 2011 अरूणाचल प्रदेष के मुख्यमंत्री के पायलट देहरादून निवासी टी.एस मौमीक के पार्थिव शरीर पर मुख्यमंत्री डाॅ. रमेष पोखरियाल निषंक के प्रतिनिधि के रूप में मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष डाॅ. देवेन्द्र भसीन ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर पूर्व मुुख्यमंत्री एवं सांसद श्री भगत सिंह कोष्यारी, विधान सभा अध्यक्ष श्री हरबंष कपूर, पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (से.नि.) बी.सी.खण्डूड़ी, विधायक गणेष जोषी आदि उपस्थित थे।

पटवारी व्यवस्था को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में है।निषंक

श्रीनगर/देहरादून 07 मई, 2011 मुख्यमंत्री डाॅ. रमेष पोखरियाल ‘निषंक’ का शनिवार को जी.आई.टी.आई. मैदान श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल) में आयोजित एक कार्यक्रम में पटवारी संघ द्वारा अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने कहा कि पटवारी व्यवस्था को और मजबूत बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में है। उन्होंने कहा कि गांव-गांव तक पटवारियों की पहुंच है, इसलिए सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में अपना पूरा सहयोग दे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पटवारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिये है। जिसके तहत पुलिस एक्ट में प्राविधान किया गया है, ताकि पटवारी व्यवस्था बनी रहे।  पटवारी पर पर होने वाली पदोन्नति प्रक्रिया के लिए आयोजित होने वाली परीक्षा को और सरल किया गया है। उन्होंने कहा कि पटवारियों के वेतनमान का उच्चीकरण कर शासनादेष जारी कर दिया गया है। सरकार ने पटवारी का पदनाम राजस्व उपनिरीक्षक कर दिया है, पटवारी कानूनगों के अनुसेवक का पदनाम राजस्व सेवक कर दिया गया है। राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी) की योब्यता स्नातक की गई है तथा वेतनमान 4500-7000 (5200-20,200) ग्रेड पे 2800 किया गया है। राजस्व सेवक को 1000 रुपये मासिक भत्ता अनुमन्य किया गया है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री दिवाकर भट्ट ने कहा कि राज्य सरकार पटवारियों के हित में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि 1164 पटवारी चैकियों का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेष के विकास में पटवारियों को महत्वपूर्ण योगदान है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री दिवाकर भट्ट, अध्यक्ष नगर पालिका मोहनलाल जैन, विधायक श्रीनगर बृजमोहन कोटवाल, जिला अध्यक्ष भाजपा मातबर सिंह रावत, अनिल गोयल उपाध्यक्ष गढ़वाल मण्डल विकास निगम राजेन्द्र रौथाण सहित अनेक गणमान्य एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
 

रोडवेज वर्कषाॅप को पीपीपी मोड में संचालित किया जायेगा।निषंक

श्रीनगर/देहरादून 07 मई, 2011 मुख्यमंत्री डाॅ. रमेष पोखरियाल ‘निषंक’ ने शनिवार को श्रीनगर (पौड़ी गढ़वाल) के भ्रमण के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए। रोडवेज बस अड्डा, श्रीनगर में आयोजित व्यापार सभा के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने व्यापार सभा के भवन निर्माण के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा की। विधायक श्रीनगर बृजमोहन कोटवाल ने भी मुख्यमंत्री की पहल पर विधायक निधि से 5 लाख रुपये देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कमलेष्वर में स्नानघाट निर्माण के लिए जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजने के निर्देष दिये। उन्होंने कहा कि पूर्व में स्वीकृत जी.आई.टी.आई. स्टेडियम के लिए प्रथम किस्त में शासन द्वारा धनराषि जारी कर दी गई है। श्रीनगर पालिका को अवस्थापना विकास के लिए 1 करोड़ रुपये की धनराषि पहले ही जारी की जा चुकी है। रोडवेज वर्कषाॅप को पीपीपी मोड में संचालित किया जायेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने कहा कि राज्य सरकार व्यापारियों की हितैषी है और उनके कल्याण के लिए सदैव वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार ने व्यापारियों के लिए व्यापार कर को 4 प्रतिषत से घटाकर 1 प्रतिषत किया है और आटा, मैदा, सूजी आदि वस्तुओं को कर मुक्त किया है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों के लिए उद्योग मित्र परिषद के साथ ही दुर्घटना बीमा योजना भी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने कहा कि प्रदेष के विकास में व्यापारियों को आगे बढ़कर आना होगा।
एक अन्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने प्रेस क्लब के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने प्रेस क्लब के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा की और जिलाधिकारी को निर्देष दिये कि प्रेस क्लब के लिए शीघ्र ही भूमि का चयन कर लिया जाय। उन्होंने कहा कि सरकार पत्रकारों के कल्याण के लिए कार्य कर रही है और इसके लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पत्रकार कल्याण कोष के लिए 2 करोड़ रुपये अतिरिक्त धनराषि की व्यवस्था की है। इसके साथ ही चिकित्सा प्रतिपूर्ति सरकारी कर्मचारियों के समान उपलब्ध करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चैथा स्तम्भ है और प्रदेष के विकास में उनके सहयोग अपेक्षित है।
इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री दिवाकर भट्ट, अध्यक्ष नगर पालिका मोहनलाल जैन, विधायक श्रीनगर बृजमोहन कोटवाल, जिला अध्यक्ष भाजपा मातबर सिंह रावत, व्यापार सभा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष हिमांषु अग्रवाल, महामंत्री कैलाष चमोली, अनिल गोयल उपाध्यक्ष गढ़वाल मण्डल विकास निगम राजेन्द्र रौथाण, प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुधीर भट्ट, महामंत्री जयकृष्ण उनियाल सहित अनेक गणमान्य एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

Friday, May 6, 2011

योग्य वर के साथ विवाह करना सामाजिक पुण्य का कार्य. निशंक

नागदा, (उज्जैन)/देहरादून 6 मई, 2011

     मुख्यमंत्री डाॅ. रमेश पोखरियाल निशंक ने उज्जैन में नागदा में पं. दीनदयाल संस्थान द्वारा मध्य प्रदेश कन्यादान योजना के अन्तर्गत 281 कन्याओं के सामूहिक विवाह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने कन्यादान योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति के अनुसार कन्यादान अर्थात कन्या का विवाह एक महत्वपूर्ण सामाजिक धार्मिक उत्तरदायित्व होता है। विशेष रूप से सभी जाति, वर्ग और धर्म की गरीब कन्याओं का उनके योग्य वर के साथ विवाह करना सामाजिक पुण्य का कार्य है। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया के अवसर पर किया जाने वाला यह शुभ कार्य निश्चित रूप से प्रशंसा के योग्य है। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान की प्रशंसा की, जिन्होंने 2006 में यह महत्वपूर्ण योजना प्रारम्भ की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार ने भी निर्धन कन्याओं के विवाह के लिए प्रति कन्या रुपये 10 हजार की सहायता की योजना प्रारम्भ की है। उन्होंने कहा कि बालिकाएं आज समाज में हर क्षेत्र में अपना एवं अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं। यह सरकार और समाज का सामूहिक उत्तरदायित्व है कि वे बिना किसी भेद भाव के बालिकाओं को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें। मुख्यमंत्री डाॅ. निशंक ने उपस्थित जनसमूह को उत्तराखण्ड सरकार की नंदादेवी कन्याधन योजना और गौरा देवी कन्याधन योजना के बारे में भी बताया।

     इससे पूर्व मुख्यमंत्री डाॅ. निशंक ने नागदा नगर पालिका के अन्तर्गत लगभग एक करोड़ 70 लाख रुपये की लागत से बनने वाले विभिन्न निर्माण कार्याे का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

     इस अवसर पर उत्तराखण्ड भाजपा प्रभारी श्री थावरचन्द्र गहलोत, मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी एस.के. द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अतिथि मौजूद थे।

Thursday, May 5, 2011

भारत को भी उत्तराखण्ड में नये रेलवे परिपथ बनाने चाहिएः डाॅ0 निषंक

नयी दिल्ली 5 मई, 2011   उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री डाॅ0 रमेष पोखरियाल निषंक ने यहां योजना आयोग के उपाध्यक्ष डाॅ0 मोन्टेक सिंह आहलूवालिया की अध्यक्षता में योजना भवन में आयोजित 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतिम वर्ष में अपने राज्य हेतु 666 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता समेत 7800 करोड़ रुपए की 2011-12 की वार्षिक योजना को अनुमोदित कराने में सफलता प्राप्त की। यह विगत वर्ष की योजना से 1000 करोड़ रुपए अधिक है।

इस अवसर पर योजना आयोग के उपाध्यक्ष डाॅ0 मोेन्टेक सिंह आहलूवालिया ने उत्तराखण्ड द्वारा हाल के वर्षों में निरन्तर बेहतर प्रगति और विकास की गति बनाये रखने की सराहना करते हुए यकीन दिलाया कि केन्द्र के स्तर पर राज्य में बेहतर रेल तथा हवाई सेवाओं की सुविधाओं के विस्तार की मांग को मंजूर कराने में वह पूरी मदद देंगे। उन्होंने सलाह दी कि राज्य इन सेवाओं के लिए अपना प्रस्ताव षीघ्रता से उपलब्ध कराये। डाॅ0 आहलूवालिया ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में पूरे राष्ट्र में उत्तराखण्ड के बेहतर कार्य की भी सराहना की।

इससे पहले उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री डाॅ0 निषंक ने देष के हिमालयी राज्यों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और समस्याओं का विस्तार से उल्लेख करते हुए पुराने हिमालयी राज्यों तथा उत्तर-पूर्व के अषान्त राज्यों के मुकाबले उत्तराखण्ड की आवष्यकताओं को भारत सरकार द्वारा नजरअंदाज करने का उल्लेख करते हुए कहा कि पड़ोसी देश चीन द्वारा भारतीय सीमा तक रेलवे का विकास किया जा रहा है। वर्तमान में बीजिंग से ल्हासा तक रेल मार्ग सृजित हो चुका है तथा उत्तराखण्ड की सीमा के सन्निकट तकलाकोट तक इसका विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संघर्ष या युद्ध की स्थिति में सीमा तक सेना एवं सैन्य सामग्री की पहुंच शीघ्रतापूर्वक सुनिष्चित हो सके, इस हेतु भारत सरकार को ऋषिकेष-कर्णप्रयाग, टनकपुर- बागेष्वर, बागेष्वर-कर्णप्रयाग रेलवे परिपथ के निर्माण कार्य शीघ्र किये जाने की आवश्यकता है। डाॅ0 निषंक ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के विकास एवं राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से शिमला-त्यूणी-लोहाघाट हिमालयन हाइवे (भ्पउंसंलंद भ्पहीूंल) का निर्माण कराया जाना आवश्यक है। इस प्रकार की संस्तुति हिमालयी राज्यों एवं क्षेत्रों की समस्याओं पर योजना आयोग, भारत सरकार द्वारा गठित टास्क फोर्स ने भी अपनी रिपोर्ट में दी है। इसे शीघ्रता से कार्यरूप दिया जाये।
उत्तराखण्ड की चीन एवं नेपाल से क्रमशः 350 किमी0 एवं 275 किमी0 लम्बी अन्तर्राष्ट्रीय सीमायें खुली होने का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों के समेकित विकास के लिये बार्डर एरिया डेवलपमैन्ट प्लान के अन्तर्गत राज्य के सभी 26 सीमान्त विकासखण्डों के विकास हेतु तथा उन्हें सड़क, विद्युत, दूरसंचार सुविधाओं से जिला मुख्यालय से जोड़ने हेतु यह योजना लागू करने की मांग की।
इस मौके पर डाॅ0 निषंक ने अनुरोध किया कि उत्तराखण्ड में सभी केन्द्र पोषित योजनाओं का वित्त पोषण पूर्वोत्तर सीमान्त के राज्यों की भांति ही 90ः10 के अनुपात में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उग्र और अषान्त क्षेत्रों को शान्त क्षेत्रों के मुकाबले अधिक महत्व दिये जाने के दोहरे मापदण्ड से गलत संकेत जाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को 2001-02 में विषेष श्रेणी राज्य का दर्जा दिया गया था, परन्तु वित्त पोषण के मामले में इस राज्य की भारी उपेक्षा की जाती है, जिसके परिमार्जन के लिए 2001-02 से 2010-11 तक की अवधि की अवषेष धनराषि 2400 करोड़ रुपए एकमुष्त विषेष पैकेज के रुप में स्वीकृत की जाय।

उन्हांेने कहा कि उत्तराखण्ड भी पूर्वोत्तर राज्यों की भांति विशेष श्रेणी का राज्य है। अतः राज्य में नैनी-सैनी (पिथौरागढ़) चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी) तथा गौचर (चमोली), हवाई-अड्डों का विकास भी इसी फार्मूले पर शत-प्रतिशत अवस्थापना अनुदान के माध्यम से भारत सरकार के वित्त पोषण से किया जाना आवश्यक है, क्योंकि ये तीनों स्थल संवेदनशील अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर भी स्थित हैं, तथा इनका सामरिक महत्व भी है। डाॅ0 निषंक ने कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची में रेलवे केन्द्रीय सूची का विषय है, इसके बावजूद उत्तराखण्ड सरकार पर रेलवे परियोजनाओं के लागत में 50 प्रतिषत की हिस्सेदारी वहन करने पर जोर डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित मुजफ्फरनगर-रूड़की रेलमार्ग की निर्माण  लागत भी शत्-प्रतिषत केन्द्र सरकार द्वारा वहन की जाये।

         डाॅ0 निषंक ने बताया कि वर्ष 2010-11 में हुई रिकार्ड अतिवृष्टि के कारण विगत 10 वर्षो में राज्य ने जो परिसंपत्तियां एवं अवस्थापना सुविधायें सृजित की थीं वह बड़ी संख्या में ध्वस्त हो गई हैं। इसके साथ ही भारी भू-स्खलन के कारण 200 से अधिक गांव विनाश के कगार पर आ गये हैं, जिन्हें समय रहते अन्यत्र बसाया जाना आवश्यक है। इन्हें पुनस्र्थापित करने में लगभग 21000 करोड रूपये का व्यय अनुमानित है। इस प्राकृतिक विभीषिका को दृष्टिगत रखते हुए क्षतिग्रस्त योजनाओं की शीघ्र पुनस्र्थापना हेतु विशेष सहायता पैकेज दिया जाय।

         मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि उत्तराखण्ड को विशेष केन्द्रीय सहायता ;ैब्।द्ध के रूप में 60 करोड़ रुपए तथा विशेष आयोजनागत सहायता ;ैच्।द्ध में 300 करोड़ रुपए ही आबंटित हुए। उन्होंने इस मामले में भी अपने राज्य को हिमाचल की भांति ही विशेष केन्द्रीय सहायता एवं विशेष आयोजनागत सहायता स्वीकृत करने की मांग की। उन्हांेने आगे कहा कि उत्तराखण्ड में लगभग 65 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है तथा मात्र 13 प्रतिशत भूमि कृषि के अन्तर्गत है। वन क्षेत्र की अधिकता के कारण विभिन्न विकास गतिविधियों को संचालित करने में अनेक बाधायें उत्पन्न होती हैं। उत्तराखण्डवासियों का वनों के विकास में जन सहभागिता करते हुए राज्य में 12089 वन पंचायतें गठित की है तथा राज्य गठन के उपरान्त वनाच्छादित क्षेत्रफल में 1141 वर्ग कि0मी0 क्षेत्रफल की वृद्धि हुई है। हाल में सम्पन्न बाघ गणना में राज्य में बाघों की संख्या में भी वृद्धि हुई है, जबकि अन्य प्रदेशों में स्थिति भिन्न है फिर भी वन्य जीव संरक्षण हेतु उत्तराखण्ड को केन्द्र से संरक्षण, संवर्द्धन तथा सहायता के साथ ही जो विषेष दर्जा दिया जाना चाहिए वह अभी तक अप्राप्त है। 
मुख्यमंत्री डाॅ0 निषंक ने जोर देकर कहा कि योजना आयोग, भारत सरकार द्वारा तैयार की गयी पर्यावरण रिपोर्ट में उत्तराखण्ड को पर्यावरणीय सेवाओं के संरक्षण के लिए देश के सभी राज्यों में प्रथम स्थान पर रखा गया है जिससे इस राज्य द्वारा किये जा रहे प्रयासों की पुष्टि होती है। इसके विपरीत वन संरक्षण अधिनियम एवं पर्यावरण सरंक्षण से सम्बन्धित विभिन्न नियमों का बोझ केवल इसी राज्य की जनता पर अनावष्यक रुप से डाला जा रहा है जिससे विकास कार्य अवरूद्ध हो रहे है।
 डाॅ0 निषंक ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य द्वारा दी जा रही प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जीवनदायी पर्यावरणीय सेवाओं को वैज्ञानिक विधि से विभिन्न संस्थाओं द्वारा आंकलन किया गया है। इनके अनुसार राज्य द्वारा लगभग 35000 से 40000 करोड़ रुपए मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवायें प्रतिवर्ष दी जानी आंकी गई है, जिनका लाभ देश ही नहीं अपितु विश्व को मिल रहा है। किन्तु इस पर्यावरण संरक्षण योगदान एवं अत्यन्त महत्वपूर्ण सेवा के एवज में राज्य को किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति नहीं की जा रही है। साथ ही उत्तराखण्ड के नदी नालों से रेता-बजरी चुगान पर भी केन्द्र द्वारा प्रतिबन्ध लगाया गया जबकि इस प्रकार का चुगान नदी नालों को नियंत्रित करने में सहायक होता है। अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने प्राकृतिक वन सम्पदा के संरक्षण के लिए उत्तराखण्ड राज्य को प्रोत्साहन स्वरूप ग्रीन बोनस के रूप में प्रतिवर्ष 1000 करोड़ रूपये का विशेष पैकेज स्वीकृत करने की भी मांग की।

        योजना आयोग के सम्मुख उत्तराखण्ड को प्रदत्त विशेष औद्योगिक पैकेज की अवधि 2013 से घटाकर मार्च 2010 में ही समाप्त करने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके कारण राज्य में निवेषित धनराषि एवं लगभग दो लाख चैसठ हजार व्यक्तियों का रोजगार गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में औद्योगिक तथा निवेष का वातावरण कायम रखने के लिए विषेष औद्योगिक सहायता पैकेज को पुनर्जीवित कर वर्ष 2020 तक बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लम्बी अवधि से विकसित राज्यों की शैशवस्था से गुजर रहे पिछड़ेपन के आधार पर गठित राज्य उत्तराखण्ड अर्थात समान से असमान की तुलना करना कदापि उचित नहीं है।

      मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी धर्मावलम्बियों के तीर्थों एवं धार्मिक स्थानों हेतु उत्तराखण्ड राज्य के प्रसिद्ध होने के कारण इस राज्य में असंख्य श्रद्धालुओं का आवागमन होता है और इनसे सम्बन्धित मूलभूत सुविधाओं, कानून व्यवस्था, सुरक्षा, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा, यातायात, पार्किंग आदि व्यवस्थाओं हेतु योजना आयोग के स्तर उत्तराखण्ड को 500 करोड़ रुपए की सहायता दिये जाने पर विचार किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार द्वारा राज्य की अनेक निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं पर रोक के कारण राज्य सरकार को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति की मांग करते हुए ऐसे अवसरों की क्षतिपूर्ति के साथ ही 2000 मेगावाट विद्युत केन्द्रीय पूल से निःशुल्क उपलब्ध कराने की मांग भी की। उन्होंने उत्तराखण्ड के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के सूखने के कारण सदानीरा नदियों से पंम्पिंग योजनाओं के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने के लिये निमार्णाधीन पम्पिंग योजनाओं को पूर्ण करने के लिए 500 करोड़ रुपए की विशेष केन्द्रीय सहायता पृथक से स्वीकृत किये जाने का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री डाॅ0 निशंक ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में अतिवृष्टि, भू-स्खलन से मोटर मार्गों का अवरूद्ध होना एवं सड़क दुर्घटनाओं से तत्काल निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा राज्य को दैवी आपदा राहत के लिए प्रतिवर्ष विशेष पैकेज के रूप में आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए। उन्होने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य के पूर्व सैनिकों के कल्याण एवं उन्हें पुनः सेवायोजित करने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा एक विशेष कार्ययोजना के तहत उत्तराखण्ड को एक अलग से पैकेज दिया जाना अपेक्षित है।मुख्यमंत्री डाॅ0 निषंक ने कहा कि वर्तमान में राज्य में प्राथमिक शिक्षा में नामांकन के सापेक्ष उच्च शिक्षा में नामांकन दर 10 प्रतिशत के लगभग है। मानक दर 33 प्रतिशत करने हेतु उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अवस्थापना सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति हेतु राज्य सरकार को केन्द्रीय सहायता की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि राज्य की जटिल भोैगोलिक परिस्थितियों तथा वन विभाग से अनापत्ति लेने में होने वाले विलम्ब से बचने हेतु अनुरोध किया कि मुख्य वन संरक्षक, केन्द्रीय क्षेत्र को 10 हैक्टेयर की जगह 20 हैक्टेयर वन भूमि के स्थानान्तरण करने का अधिकार अनुमन्य किया जाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी कार्यक्रम (मनरेगा) के प्रभावी एवं बेहतर प्रबन्धन के लिए इसके अन्तर्गत प्रषासनिक व्यय 6 प्रतिषत से बढ़ाकर 10 प्रतिषत किया जाना चाहिए। धनराषि अनेक किस्तों की बजाय दो किस्तों में जारी की जानी चाहिए। समाज के कमजोर वर्गों की माँग को ध्यान में रखते हुए 100 दिवसों के रोजगार की बजाय कम से कम 120 दिवसों का रोजगार दिया जाना चाहिए तथा परियोजना के अन्तर्गत सामग्री ;डंजमतपंसद्ध अंष को 40 प्रतिषत से बढ़ाकर 50 प्रतिषत किये जाने की आवष्यकता है। उन्होंने कहा कि त्वरित ऊर्जा विकास एवं सुधार परियोजना ;।च्क्त्च्द्ध के अन्तर्गत वर्तमान में 10 हजार से अधिक जनसंख्या के 31 नगर आच्छादित है। भारत सरकार से अनुरोध है कि राज्य की विरल जनसंख्या एवं छोटे कस्बों की बहुतायत को देखते हुए इस परियोजना के चयन हेतु जनसंख्या के मानक को 10 हजार से घटाकर 5 हजार किया जाय।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वर्ष 11वीं पंचवर्षीय योजना का अन्तिम वर्ष है तथा आपके मार्गदर्शन में 12वीं पंचवर्षीय योजना का कार्य चल रहा है। अतः यह उचित अवसर होगा कि हमारे राज्य द्वारा अनुभूत समस्याओं का समुचित निराकरण किया जाय। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बीपीएल परिवारों की लड़कियों की षिक्षा के लिए ‘‘गौरा देवी कन्या धन योजना’’ व गांवों के समग्र विकास के लिए प्रत्येक न्याय पंचायत में से एक ग्राम का चयन कर 670 ग्रामों में ‘‘अटल आदर्ष ग्राम योजना’’ प्रारम्भ की गई है। इसके अलावा राज्य के महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों को यातायात सुविधाओं से जोड़ने के विशेष प्रयास किये जा रहें हैं। इसके लिए सड़क निर्माण, रज्जु मार्गों का निर्माण, हैलीपैड्स की स्थापना तथा राज्य के हवाई-अड्डों के विस्तारीकरण पर जोर दिया जा रहा है ताकि उच्च आय-वर्ग के पर्यटक राज्य की ओर आकर्षित हो सकंे। उन्होंने कहा कि राज्य में 73वें संविधान संशोधन विधेयक के प्रावधानों के अनुरूप जनपद स्तरीय जिला नियोजन समितियों का गठन किया जा चुका है तथा चयनित प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर दी गई है।

      डाॅ0 निषंक ने कहा कि वाह्य सहायतित परियोजनाओं, संसाधन आधारित केन्द्र पोषित योजनाओं, अन्य केन्द्रीय योजनाओं के राज्यांश की व्यवस्था, एवं जिला नियोजन समितियों द्वारा अनुमोदित योजनावार परिव्यय को सम्मिलित करते हुये राज्य संसाधन आधारित परिव्यय  6200 करोड़ रूपए के (प्रस्तावित) सापेक्ष लगभग 4136.45 करोड़ रूपए का परिव्यय वचनबद्ध मदों में प्रस्तावित है। अतः राज्य सेक्टर, जिसके अन्तर्गत क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूर्ण करने हेतु अतिमहत्वपूर्ण अवस्थापना एवं सामाजिक क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करना होता है, उसके लिये थ्सवंजपदह परिव्यय अत्यधिक कम रह जाता है। अतः वार्षिक योजना पर अन्तिम अनुमोदन के समय इस बिन्दु पर विचार किया जाना चाहिए।

 

Wednesday, May 4, 2011

मुख्यमंत्री ने मण्डलायुक्तों को जिम्मेदार बनाने के निर्देष दिये

देहरादून 04 मई, 2011
मुख्यमंत्री डाॅ. रमेष पोखरियाल निषंक ने मुख्य सचिव को निर्देष दिये हैं कि अंत्योदय विकास यात्रा के अन्तर्गत प्राप्त हो रहे प्रार्थना पत्रों का समयबद्ध सीमा के अन्दर निस्तारण किया जाय। मुख्यमंत्री ने प्रार्थना पत्रों के निस्तारण का अनुश्रवण करने के लिए दोनों मण्डलायुक्तों को जिम्मेदार बनाने के निर्देष दिये हैं। साथ ही मुूख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को आदेष दिया है कि वे अपने जनपदों में  औचक निरीक्षण कर अटल आदर्ष ग्रामों और अटल खाद्यान्न योजना का कड़ाई से अनुश्रवण करें। उन्होंने कहा है कि जिलाधिकारियों को जनपदों में विभिन्न प्रकार की जन सेवाओं का लगातार अनुश्रवण करते हुए यह सुनिष्चित करें, कि सरकार की विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने अन्य जनपद स्तरीय अधिकारियों द्वारा भी दूरस्थ क्षेत्रों तक भ्रमण एवं रात्रि प्रवास करने के निर्देषों पर अनुपालन आख्या तलब की है। 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वयं अभी तक 30 से अधिक विधानसभाओं में अंत्योदय विकास यात्रा के अन्तर्गत प्रदेष के दूरस्थ स्थानों तक पहुंचकर जनता से सीधा संवाद कर चुकेे हैं। मुख्यमंत्री ने इन यात्राओं में अभी तक लगभग 350 करोड़ से अधिक की योजनाओं का लोकार्पण एवं षिलान्यास किया है। लोकार्पण एवं षिलान्यास के अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा जनता से सीधे संवाद कार्यक्रम में अधिकारियों को मौके पर ही जनता की समस्याओं को निस्तारित करने के निर्देष दिये गये हैं। इन यात्राओं में कार्यो में उदासीनता बरतने वाले कुछ अधिकारियों को मौके पर ही दण्डित किया गया है, तो अच्छा काम करने वाले बहुत से अधिकारियों को प्रषंसा भी मिली है।

Tuesday, May 3, 2011

जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगीडंगवाल

देहरादून 03 मई, 2011
 उप सचिव राज्य निर्वाचन आयोग जे.पी. डंगवाल ने बताया है, कि जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के निर्वाचन में निर्वाचक (मतदाता) की निरक्षरता, अन्धता या अन्य अषक्तता के कारण सहायक/साथी उपलब्ध कराने के संबंध में दिषा निर्देष जारी कर दिये गये हैं। इसके अनुसार सहायक की मांग करने वाला निर्वाचक (मतदाता) साक्षर है या निरक्षर इस बात का सत्यापन उसके द्वारा दाखिल शपथ-पत्र से कर लिया जाय। यदि निर्वाचक अपनी अन्धता या अन्य अषक्तता के कारण सहायक की मांग करें, तो उसे जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा। यदि किसी निर्वाचक को सहायक/साथी दिया जाय, तो उस विषय में यह सुनिष्चित भी किया जाय, कि वह 21 वर्ष से कम आयु का न हो, वह इतना साक्षर हो कि मतपत्र को पढ़ सकने तथा उस पर निर्वाचक की इच्छानुसार उसकी ओर से मत अभिलिखित कर सकने और यदि आवष्यक हो तो मत को छिपाने के लिए मत पत्र को मोड़ने और उसे मत पेटी में डालने में समर्थ हो, वह अराजनैतिक हो तथा इस निर्वाचन में खड़े प्रत्याषियों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रिष्तेदार न हो, सहायक/साथी निर्विवादित होना चाहिए और इस निर्वाचन में एक से अधिक निर्वाचक/सदस्य के साथी के रूप में कार्य करने के लिए अर्ह नहीं होगा।

उन्होंने बताया है कि जिला पंचायत के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पदों के निर्वाचन में संबंधित पंचायत के सदस्य को अपनी निरक्षरता, अन्धता या अन्य अषक्तता के कारण सहायक की मांग करने की दषा में जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी के समक्ष इस निर्वाचन के मतदान के प्रारम्भ होने के 72 घंटे पहले शपथ-पत्र, प्रमाण-पत्र एवं अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यदि सहायक/साथी उपलब्ध कराने संबंधी निर्णय की जानकारी मतदान प्रारम्भ होने के 48 घंटे पूर्व आयोग को नहीं दी गई तो यह समझा जायेगा कि आयोग के निर्देषों के अनुरूप नहीं है और सहायक/साथी उपलब्ध कराने संबंधी ऐसी अनुमति को आयोग द्वारा निरस्त कर दिया जायेगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी। यदि सहायक की मांग मतदान प्रारम्भ होने के 72 घंटे के पूर्व प्राप्त नहीं होती है, तो किसी भी निर्वाचक को सहायक/साथी स्वीकृत नहीं किया जायेगा, परन्तु आपातकालीन परिस्थिति जैसे अचानक दुर्घटना की स्थिति में निर्दिष्ट व्यवस्था के अनुरूप सहायक की मांग, हेतु आवेदन-पत्र प्राप्त होने पर जिला निर्वाचन अधिकारी, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा समस्त तथ्यों को आयोग के संज्ञान में लाते हुए आयोग के परामर्ष से ही सहायक/साथी को अनुमन्य कराया जा सकेगा अन्यथा नहीं। निर्वाचक के सहायक/साथी का कार्य कर रहा है और किसी अन्य निर्वाचक के सहायक/साथी का कार्य उस दिन न तो किया है न उस दिन करेगा।

मुख्यमंत्रीने जनकल्याणकारी योजनाओं को शत-प्रतिषत पात्र लाभार्थियों को समय से देने के निर्देष दिये।

पिथौरागढ़/देहरादून 03 मई, 2011
 अन्त्योदय विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री डाॅ. रमेष पोखरियाल निषंक ने विकासखण्ड विण के मोस्टामानू में 53 करोड़ 24 लाख रुपये लागत की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण एवं षिलान्यास किया। विकास यात्रा में उमड़े विषाल जनसमूह से सीधा संवाद करते हुए मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने अधिकारियों को उनकी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देष दिये। विकास यात्रा के अन्तर्गत आयोजित षिविर में 44.07 लाख रुपये की विभिन्न योजनाओं के तहत 264 लाभार्थियों को चैक के माध्यम से धनराषि वितरित की गई।मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक 4592 लाख रुपये लागत से निर्मित होने वाले पिथौरागढ़ बेस अस्पताल, 314.50 लाख रुपये लागत से निर्मित होने वाले दिगतोली-दियूड़ी मोटर मार्ग विस्तार नैनी से चंडिका घाट तक स्वीकृत 15 कि.मी. मोटर मार्ग, 267 लाख रुपये लागत से निर्मित होने वाले अनुसूचित जाति/जनजाति योजना के अंतर्गत जाख-रावलगांव-धरासी- चमोला -रामेष्वर मोटर मार्ग का नवनिर्माण का षिलान्यास, 40.40 लाख रुपये लागत से निर्मित होने वाले रा.उ.मा.वि. बजेटी के भवन, 13 लाख रुपये लागत से रा.इं.का. मायालेख में दो कक्षाकक्ष एवं बरामदे का निर्माण, एस.डी.एस.रा.इ.का. में 11 लाख रुपये से निर्मित विज्ञान प्रयोगषाला भवन और 30.22 लाख रुपये लागत से निर्मित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय सेठीगांव का षिलान्यास किया। उन्होंने 31.23 लाख रुपये से निर्मित स्टेडियम में स्टोर रूम एवं बास्केटबाल कोर्ट तथा 12.12 लाख रुपये से निर्मित ग्राम पंचायत चैंसर में जिम्नेजियम हाॅल के निर्माण का लोकार्पण भी किया।मुख्यमंत्री ने शरदोत्सव विकास प्रदर्शनी हेतु 25 लाख रुपये, राष्ट्रीय स्तर के फुटबाल टूर्नामेंट के आयोजन हेतु 5 लाख रुपये, मोस्टामानू मेले हेतु 2 लाख रुपये, नगर पालिका पिथौरागढ़ को ‘ए’ श्रेणी दर्जा दिये जाने हेतु परीक्षण, इंटर कालेज सल्ला चिंगरी, वास्ते, दिगतोली एवं डुगराकोट की स्वीकृति एवं हाईस्कूल मड़, विषाण, बेड़ा, उपरतोला, भाटीगांव, पाभें, तोली एवं पंत्थ्यूड़ी की स्वीकृति और रा.इं.का.बांस में विज्ञान विषय, रा.इ.का.कमलेष्वर में कृषि विषय, रा.इं.का. गुरना में संस्कृत विषय की कक्षाएं प्रारम्भ करने, पिथौरागढ़ में स्पोटर्स कालेज की कक्षाएं शुरू करने, घाट व आंवलाघाट पंपिंग योजना का कार्य प्रारम्भ करने, पिथौरागढ़ मुख्यालय के आंतरिक मोटर मार्ग तथा रिंग रोड में हाॅटमिक्स करवाये जाने, कुमायूं विष्वविद्यालय कैंपस पिथौरागढ़ में खाले जाने हेतु परीक्षण की घोषणा की।उन्होंने गोरंगदेष, बुंगासोराड़ी, पंचेष्वर तथा जाखपुरान-थरकोट ग्राम समूह पेयजल योजना के परीक्षण की स्वीकृति के साथ ही आगर-थरकोट तथा झूणी-विण में ए.एन.एम. केन्द्र की स्थापना, मूनाकोट में पाॅलिटेक्निक तथा बड़ाबे में आई.टी.आई. खोले जाने हेतु परीक्षण के निर्देष दिये। उन्होंने गौडिया गांव की बी.पी.एल. परिवार की पूजा जोषी को विवेकाधीन कोष से 20 हजार रुपये, खुनुदी बेगम की विकलांग लड़की हेतु 10 हजार रुपये देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने शत-प्रतिषत विकलांगों को राज्य सडक परिवहन की बसों में निःषुल्क यात्रा के निर्देष परिवहन विभाग को दिये।मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक मंगलवार को मोस्टामानू पहुंचकर विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण/षिलान्यास करने के बाद रामलीला मैदान मोस्टामानू में जनता के बीच जाकर लोगों की समस्याओं को सुना और उनके त्वरित निस्तारण हेतु आयुक्त कुमाऊं मण्डल सहित मण्डलीय एवं अन्य अधिकारियों को निर्देष दिये। उन्होंने समाज कल्याण विभाग से संबंधित प्राप्त आवेदनों के संबंध में उपस्थित आवेदनकार्ताओं से मौके पर ही उसकी समस्या सुनी और समाज कल्याण अधिकारी को समाज कल्याण द्वारा दी जा रही व्यक्तिपरक जनकल्याणकारी योजनाओं को शत-प्रतिषत पात्र लाभार्थियों को समय से देने के निर्देष दिये।
उन्होंने समाज कल्याण सहित, बाल विकास, महिला कल्याण की योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों को मिले इस हेतु बृहद प्रचार-प्रसार करने के निर्देष मुख्य विकास अधिकारी को दिये। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों, विद्यालयों के माध्यम से कार्यक्रम आयोजित कराये। मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने अटल आदर्ष गांवों को सभी सुविधाओं से जोड़ने तथा मिनी सचिवालय के रूप में कार्य करने के साथ ही इन गांवों में एक-एक नोडल अधिकारी की तैनाती करने के निर्देष दिये, ताकि मौके पर ही समस्याओं का समाधान हो सके। मुख्यमंत्री ने पेयजल आपूर्ति हेतु आए सभी प्रार्थना पत्रों पर त्वरित गति से निस्तारण करने के निर्देष के साथ ही लोनिवि को लंबे समय से लंबति सडको पर त्वरित गति से कार्य करने के निर्देष दिये। उन्होंने सातषिलिंग से नाघर-भुलगांव तक 6 कि.मी. सडक को 15 जुलाई तक पूर्ण करने, जगतड़ से पाभें व किनीगाड़ सडक को 3 माह के अन्तर्गत प्रारम्भ करने के निर्देष दिये। उन्होंने जनपद में वन अधिनियम के अंतर्गत प्रस्तावित सडकों के त्वरित निस्तारण के साथ ही पेयजल, विद्युत एवं सडक की समस्याओं के निदान हेतु आयुक्त कुमायूं मण्डल इसी माह में बैठक आयोजित कर आवष्यक कार्यवाही करने के निर्देष दिये।इस अवसर पर प्रदेष अध्यक्ष भाजपा विषन सिंह चुफाल, पेयजल मंत्री प्रकाष पंत, आई.आई.आई. सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष केदार जोषी, के.एम.वी.एन. के उपाध्यक्ष माधवानंद जोषी, सहकारिता परिषद के उपाध्यक्ष हयात सिंह महरा, जिला पंचायत अध्यक्ष सुनीता देवी, विधायक धारचूला गगन रजवार, आयुक्त कुमायूं मण्डल कुणाल शर्मा, जिलाधिकारी एन.एस.नेगी सहित गणमान्य लोग एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

मौत की नींद सोते पुलिसकर्मी।

दो दायित्वधारियो के गनर लगा चुके हं मौत को गले। मानसिक व राजनैतिक दबाव के चलते बड़ रही हैं घटनाएं। देहरादून। पुलिस महकमे के जवान लगामर मौत को गले लगाकर महकमे की नींद उड़ा रहे हैं। लगातार आत्मघाती कदम उठाये जाने से पुलिस महकमा भी परेशान हो उठा है। पिछले 3 महीने के अन्दर सरकार के दो दायित्व धारियों के गनरो ने अपने सरकारी हथियारो से मौत को गले लगाकर यह बात साबित कर दी है कि उन पर काम का बोझ काफी है जिस कारण वह लगातार इस तरह के कदम उठाकर पूरे महकमे को सोचने पर मजबूर कर रहे हैं। अब तक सेना के जवानो द्वारा ही मानसिक तनाव के चलते मौत को गले लगाए जाने की खबरे सुनाई देती थी लेकिन अब उत्तराखण्ड पुलिस के ऐसे पुलिस कर्मी जो अभी 25 से 30 की उम्र के हो उनके द्वारा आत्मघाती कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस महकमे में लगातार इस तरह की घटनाएं बड़ती जा रही है जो विभाग के लिए अब सिरदर्द बनती नजर आ रही हैं। पूर्व डीजीपी सुभाष जोशी द्वारा मानसिक तनाव कम किए जाने को लेकर प्रत्येक माह महकमे को अपडेट किए जाने के निर्देश सभी जिलो के पुलिस कप्तानो को दिए गए थे और साथ ही इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए भी आवश्यक कार्यवाही किए जाने की बात कही गई थी लेकिन अभी तक किसी जिले में इस तरह की घटनाओं को राकने के लिए कोई कार्यक्रम आयोजित नही किए गए और ना ही पुलिस कर्मियो को मानसिक तनाव कम करने के लिए कोई जरूरी इन्तजाम किए गए। लगामार महकमें में पुलिस कर्मी मानसिक तनाव के चलते मौत को गले लगाते जा रहे हैं जो पुलिस महकमें के लिए खतरे की घंटी से कम नही हैं। पुलिस के आलाअघिकारी भी मानते है कि काम के बोझ के साथ साथ राजनैतिक दबाव के चलते इस तरह की घटनाएं लगातार बड़ रही है लेकिन राजनैतिक दबाव के चलते अभी तक किसी भी पुलिस कर्मी द्वारा आत्मघाती कदम उठाए जाने की बाते सामने नही आई हैं और अब तक जितने भी पुलिस कर्मियो द्वारा आत्मघाती कदम उठाए गए उन सभी में मानसिक तनाव की बातें प्रमुख रूप से सामने आई हैं। इसके साथ ही सत्ता में भाजपा की सरकार के आने के बाद से सरकार के 2 दायित्व धारियों जिनमे सबसे पहले हल्द्वानी के दायित्वधारी हेमन्त द्विवेदी के गनर गुड्डु साहु एवं देहरादून के दायित्वधारी सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष श्री कुड़याल का गनर दिनेश कुमार अपने को मौत की नींद सुला चुका है और इससे पहले वर्ष 2001 में हरिद्वार में तैनात एलआइयू का पुलिस कमी रामराज पवार, देवप्रयाग चैकी हिन्डोला खाल में एक कान्सटेबल, पिथौरागड़ में एक कान्सटेबल वर्ष 2009 में नैनीताल में सूरज कुमार जगवीर सिंह, वर्ष 2010 में वीजेन्द्र कुमार एवं इसके अलावा कई पुलिसकर्मी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की नींद सोते मिल चुके हैं। जिस कारण लगातर पुलिस कर्मियो द्वारा आत्मघाती कदम उठाए जाने के पीछे मानसिक तनाव एवं राजनैतिक दबाव सामने खुलकर आया है वहीं कई मामलो में मौत के कारणो की विभागीय जांच तक नही की जा सकी है जिस कारण अभी भी कई पुलिस कर्मियो की मौत की गुत्थी उलझाी हुई है। एक तरफ पुलिस महकमा जनता को मित्रता सेवा सुरक्षा का नारा देकर आगे बड़ाने की बात कह रहा है वही दूसरी तरफ पुलिस के जवान लगातार मौत को गले लगाते जा रहे है। इतना ही नहीं रूद्रपुर में 30 मार्च को आर्शीवाद अस्पताल में अर्जुनधर की हुई मौत के बाद अभी तक उसके बिसरे की जांच पूरी नही हो सकी है और रूद्रपुर के ही करीब सात आठ लोग के भेजे गए बिसरो को आगरा से लौटा दिया गया है और कई मामलो में अभी बिसरो की जांच पूरी ना हो पाने के चलते कार्यवाही बधर में लटकी हुई है। बिसरो की जांच समय पर किए जाने को लेकर गदरपुर पंतनगर विघायक पे्रमानंद महाजन ने जनपद के एसएसपी अजय रौतेला व आईजी रामसिंह मीढ़ा को भी समय पर जांच पूरी करवाने के लिए कहा है। कुल मिलाकर पुलिस महकमे में लगातार आत्मघाती कदम रोकने के लिए कोई ठोस प्रक्रिया को अंजाम नही दिया जा सका है।

संस्कार जीवन में संघर्ष करने पर ही सृजित होते हैं निषंक

देहरादून 03 मई, 2011
मुख्यमंत्री डाॅ. रमेष पोखरियाल निषंक मंगलवार को बंसत विहार में श्री चमन लाल प्रद्योत के 76वें जन्म दिवस पर आयोजित साहित्यिक गोष्ठी में शामिल हुए। मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने इस अवसर पर श्री प्रद्योत द्वारा रचित पुस्तक ‘मंथन के क्षण’ तथा डाॅ. नागेन्द्र ध्यानी ‘अरुण’ द्वारा श्री प्रद्योत के साहित्यिक जीवन पर लिखित पुस्तक ‘कवि प्रद्योत की काव्य कला का शास्त्रीय अध्ययन’ का विमोचन किया तथा श्री प्रद्योत को उनके 76वें जन्मदिवस की बधाई दी।इस अवसर पर मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने कहा कि श्री प्रद्योत द्वारा साहित्यिक क्षेत्र में किये गये कार्य सराहनीय है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र है। उन्होंने कहा कि जीवन के महत्वपूर्ण विषयों को पुस्तक के माध्यम से चिन्हित किया गया है, जिनका अपना अलग महत्व है। मुख्यमंत्री डाॅ. निषंक ने कहा कि जीवन को बदलने के लिये एक शब्द ही बहुत है। उन्होंने कहा कि संस्कार जीवन में संघर्ष करने पर ही सृजित होते हैं और जीवन को तभी वास्तव में समझा जा सकता है। उन्होंने मनुष्य को ईष्वर की श्रेष्ठतम कृति बताते हुये कहा कि जीवन को संघर्षमय व कर्मषील बनाते हुये जीना चाहिए न कि अकर्मण्य रह कर इसे ढोना चाहिए। उन्होंने जीवन की सार्थकता तथा पुस्तक के कुछ अंषो की व्याख्या प्रस्तुत करते हुये कहा कि पुस्तक भावी पीढ़ी के लिये मार्गदर्षक व प्रेरणास्पद होगी।इससे पूर्व साहित्यिक गोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर खेल मंत्री खजान दास ने किया। साहित्यक गोष्ठी में पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी, डाॅ. सविता मोहन, डाॅ. बुद्धिनाथ मिश्र, डाॅ. नागेन्द्र ध्यानी, मदन मोहन ढुकलाण, राम प्रताप साकेती, डाॅ. मुनिराम सकलानी, श्रीमती जसपाल कौर, श्रीमती वीणा पाणी जोषी, पुस्तक के प्रकाषक कीर्ति नवानी, दायित्वधारी मोहम्मद कादिर हुसैन, आदित्य कोठारी, अपर सचिव अजय प्रद्योत, महानिदेषक सूचना सुबर्द्धन आदि उपस्थित थे।

विकास कार्यक्रमों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे।मुख्य सचिव

देहरादून 03 मई, 2011



विकास योजनाओं का मौके पर निरीक्षण एवं सत्यापन करने तथा जनता से सीधा संवाद कायम कर उनकी समस्याओं का मौके पर ही निराकरण करने के लिए मुख्य सचिव सुभाष कुमार मई महीने के पहले सप्ताह में गढ़वाल मण्डल के सुदूरवर्ती क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे। इस दौरान मुख्य सचिव देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रूद्रप्रयाग, चमोली जनपदों के दूरस्थ क्षेत्रों का दौरा करेंगे। मुख्य सचिव इन भ्रमण कार्यक्रमों के दौरान रात्रि विश्राम जनपदों के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में करेंगे तथा वहां की समस्याओं को मौके पर ही सुनकर विभागीय अधिकारियों के माध्यम से उनका प्रभावी निराकरण भी करायेंगे। विकास योजनाओं को मौके पर सत्यापन के दौरा कोई गडबडी पाये जाने पर मुख्य सचिव संबंधित अधिकारी के विरूद्ध मौके पर ही कार्यवाही भी करेंगे।

मुख्य सचिव बिजली, पानी, सड़क, चिकित्सा, षिक्षा आदि क्षेत्रों में संचालित योजनाओं की जानकारी मौके पर ही विभागीय अधिकारियों से लेंगे और यदि किसी अधिकारी के विरूद्ध कोई गंभीर षिकायत प्राप्त होगी, तो मौके पर ही उनके विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जायेगी। इस संबंध में जनपदों के जिलाधिकारियों को निर्देष जारी कर दिये गये कि जिन-जिन स्थानों पर मुख्य सचिव जनता की समस्याओं को सुनेंगे, वहां पर संबंधित विभागों के सभी अधिकारी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। संषोधित भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार मुख्य सचिव 8 मई को देहरादून से प्रस्थान कर नगुण भवान में सुवांखोली, अलमस, नगुण के निर्माणाधीन सड़कों तथा विकास कार्यक्रमों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। इसके पश्चात वे नगुण, कमांद, धौलधार होते हुए लम्बगांव में रात्रि विश्राम करेंगे और जनता एवं जनप्रतिनिधियों से भेंट करेंगे। 9 मई को मुख्य सचिव कुठाल गांव में चम्याल रोड का निरीक्षण करेंगे और उसके पष्चात जखोली में जनता एवं जनप्रतिनिधियों के साथ भेंट करेंगे। श्री कुमार इसी तिथि को जखोली, अगस्तयमुनि, रूद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग सडक का मौके पर मुआयना करने के साथ ही इस क्षेत्र में संचालित विकास योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण एवं सत्यापन करेंगे। मुख्य सचिव रात्रि विश्राम गैरसैण में करेंगे।मुख्य सचिव 10 मई को गैरसैण में जनता एवं जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। उसके पष्चात नागचूला खाल, बुंगीधार पीठसैण होते हुए थैलीसैण पहुंचेंगे, जहां वे स्थानीय लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनेंगे। वे रात्रि विश्राम धुमाकोट में करेंगे। 11 मई को मुख्य सचिव धुमाकोट में जनता एवं जनप्रतिनिधियों के साथ भेंट करेंगे। श्री सुभाष कुमार इसके पष्चात धुमाकोट से प्रस्थान कर रथूवाढाब, दुगड्डा, द्वारीखाल होते हुए यमकेष्वर पहुंचेंगे, जहां वे जनता और जनप्रतिनिधियों से मिलेंगे। इसी दिन वे सांय काल लक्ष्मणझूला होते हुए देहरादून वापस लौट आयेंगे।

 

चारधाम यात्रा देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान.निषंक

देहरादून 02 मई, 2011

मुख्यमंत्री डाॅ. रमेष पोखरियाल निषंक ने सोमवार देर सायं सचिवालय में वीडियों कान्फ्रेसिंग के माध्यम से चारधाम यात्रा मार्ग के जनपदों के जिलाधिकारियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यात्रा की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने विभागाध्यक्षों, शासन और जिला प्रषासन के मध्य समन्वय के आभाव पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए मण्डलायुक्त गढ़वाल को समन्वय स्थापित करने के निर्देष दिये। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को यात्रा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने के निर्देष देते हुए कहा कि इस दिषा में किसी भी स्तर के अधिकारी की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से सीधा सवाल किया कि पिछले वर्ष की समस्याओं और चुनौतियों से सीख लेते हुए इस वर्ष उन्होंने क्या सुधार किये हैं। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान है और शासन तथा जिला प्रषासन को यात्रा व्यवस्था के सभी कार्य शीर्ष प्राथमिकता पर रखने होंगे। जीएमवीएन के कार्मिकों द्वारा की जा रही हड़ताल पर मण्डलायुक्त गढ़वाल को रिपोर्ट देने के निर्देष दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा शीर्ष प्राथमिकता होगी और परिवहन विभाग को इस दिषा में विषेष प्रयास करने होंगे। उन्होंने केदारनाथ और बदरीनाथ में हेलीपैड समय से प्रारम्भ करने के निर्देष दिये।  उन्होंने पीडब्ल्यूडी और बीआरओ को यात्रा मार्गो को सही स्थिति में रखने के निर्देष दिये। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और खाद्य विभाग को खाद्यान्न, रसोई गैस और मिट्टी के तेल की आपूर्ति सुनिष्चित करने के निर्देष दिये। उन्होंने गंगोत्री और केदारनाथ में पार्किंग की व्यवस्था सुचारू बनाये रखने के निर्देष दिये। मुख्यमंत्री ने यात्रा मार्गो पर चिकित्सालयों में दवाईयों और स्टाफ की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने पर्यटन विभाग को एक करोड़ 51 लाख रुपये की धनराषि तत्काल मण्डलायुक्त के निर्वतन पर रखने के निर्देष दिये, जिससे चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं में धन की कमी न हो। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबन्धन विभाग को निर्देष दिये कि यात्रा मार्ग पर आपदा प्रबन्धन तथा राहत एवं बचाव कार्य के लिए बनाई गई रणनीति की पुनः तीन दिन के भीतर समीक्षा कर लें। उन्होंने पुलिस महानिदेषक को चारधाम एवं यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी आवष्यक कदम उठाने के निर्देष दिये। उन्होंने चारधाम विकास परिषद और श्री बदरी-केदार मंदिर समिति को यात्रियों के लिए प्रसाद एवं स्मृति चिन्ह की व्यवस्था करने के निर्देष दिये।

जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग ने बताया कि केदारनाथ में अभी भी बर्फ होने के कारण कार्य अपेक्षाकृत धीमी गति से हुये हैं परन्तु कपाट खुलने के पूर्व पैदल मार्ग और हेलीपैड सुचारू कर लिया जायेगा। जिलाधिकारी ने बताया कि गत वर्ष पार्किंग की समस्या से सीख लेेते हुए इस वर्ष सोनप्रयाग के निकट लगभग 50 बड़े वाहनों के योग्य नई पार्किंग बनाई गयी है। केदारनाथ तक बिजली पहुंच गई है। जिलाधिकारी चमोली ने बताया कि बदरीनाथ में सभी आवष्यक सुविधाएं जुटा ली गई है। उन्होंने बताया कि बीआरओ द्वारा सड़क चैड़ीकरण में संतोषजनक कार्य किया गया है परन्तु लामबगड़ में वर्षा काल में समस्या आ सकती है। बीआरओ द्वारा लामबगड़ क्षेत्र में इस दिषा में कार्य किया जा रहा है। जिलाधिकारी उत्तरकाषी ने बताया कि गंगोत्री धरासू मार्ग में सुक्खी टाॅप के निकट थोड़ी समस्या है, जिसे बीआरओ द्वारा दूर करने के प्रयास किये जा रहे हैं।

मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने बताया कि यात्रा व्यवस्था के अन्तर्गत सड़कों, पेयजल, शौचालय, चिकित्सालय, खाद्यान्न, बिजली एवं कोयला की आपूर्ति, परिवहन विभाग आदि की नियमित समीक्षा की जा रही है। जिलाधिकारियों को विभागों के साथ समन्वय बना कर काम करने के निर्देष दिये गये हैं। परिवहन विभाग को वाहनों की फिटनेस और ग्रीन कार्ड का नियम कड़ाई से लागू करने के निर्देष दिये गये हैं। जिलाधिकारियों को यात्रा मार्ग की सभी सुविधाओं का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण करने के निर्देष दिये गये हैं।

बैठक में चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष सूरत राम नौटियाल, श्री बदरी-केदार मंदिर समित के अध्यक्ष ए.पी. भट्ट, प्रमुख सचिव वित्त, आलोक जैन, पर्यटन राकेष शर्मा, परिवहन एस. रामास्वामी, गृह राजीव गुप्ता, नागरिक उड्डयन पी.सी. शर्मा, सचिव मुख्यमंत्री डाॅ. उमाकांत पंवार, खाद्य आयुक्त सुबर्द्धन सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, विभागाध्यक्ष एवं जनपदों में जनपद स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

सरकार ने तैयार की गांव की कुंडली।

देहरादून। । राजनेताओ को अपनी पसंदीदा राजनैतिक ड्रैस में हर कोई देखता है लेकिन अगर प्रदेश के मुख्यमंत्री जीन्स और टीशर्ट में देखे हुए नजर आए तो यह प्रदेश के मुख्यमंत्री के पहनावे में युवाओ के प्रति आकर्षण का केन्द्र होगा। उत्तराखण्ड को देश का आदर्श राज्य बनाने के लिए जितनी मेहनत प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल करने में लगे हैं उससे निश्चित रूप में आदर्श राज्य का सपना विधानसभा चुनाव 2012 के मिशन रूप में पहली कड.ी के रूप में सामने आ सकता है। प्रदेश के हर व्यक्ति को विकास की पगडंडी से जोड़ने का प्रयास निश्चित रूप से जनता के बीच भी सरकार से जुड़ने के रूप में देखा जा रहा हे और मुख्यमंत्री की विकास यात्राओ में उमड़ रही भीड़ इसका उदाहरण है। प्रदेश भर में अपनी विकास यात्राओ के माध्यम से अपने कामकाज की खुद समीक्षा प्रदेश के सीएम कर रहे हैं और क्षेत्रो मे आ रही जनता की परेशानियों को भी करीब से जानने का प्रयास करते हुए नजर आ रहे हैं। इन दौरो ने आम जनता के बीच जहो सीएम की छवि को प्रदेश के प्रति विकास की सोच रखने में बदल डाला ळै वही मुख्यमंत्री के वर्ष 2011-12 के लिए पेश किए गए 6465 करोड़ के हिमालयी राज्योें के सबसे बड़े बजट को पेश करने में अपनी अलग पहचान छोड़ी है। इसके साथ ही विकास यात्राओ के बाद अब प्रदेश के मुख्यमंत्री की अनत्योदय यात्रा के माध्यम से आम जन के लिए घोषणएं की जा रही है उससे हर वग का रूझान भाजपा की तरफ मुड़ता हुआ देखा जा रहा है। वर्ष 2011 -12 की योजना में प्रदेश के हर गांव तथा शहरी क्षेत्रो के हर वार्ड में निर्माण और विकास के वही काम होगे जो वहां के लोगो ने तय किए हैं। मतलब जनता के अनुरूप विकस की अवधारणा को प्रदेश में शरू कर दिया गया ळै। इससे पहले जिलो में विकास के लिए धन उपलब्ध नही रहता था लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने जिलो के विकास के लिए सीधे जिलो के जिलाधिकारियों को धन उपलब्ध कराने केसाथ साथ जिलो में विकास तेज गति से करने का खाका भी तैयार किया इसीका परिणाम रहा कि पैसे की कमी का रोना रोने वाले अधिकारियो को समय से धन उपलब्ध होता रहा और विकास के काम भी सुचारू रूप् से चलते रहे। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रो में आम जनता के हिसाब से विकास की किरण आगे बड़ती रहे इसे लेकर अब जनता भी जागरूक होती जा रही है। और वह विकास में खुलकर सहयोग भी कर रही ळै। राज्य सरकार ने जिला योजना के लिए पर्याप्त धन आवंटन कर विकास को तेज गति दी है इसके साथ ही सरकार ने गांव की कुंडली भी बना डाली है जिसमे गांव के विकास उपलब्ध संसाधनो एवं विभिन्न योजनाओ की जानकारी सीधे जनता को उपलब्ध हो सकेगी। चुनावी साल होने के कारण विपक्षी राजनैतिक पार्टीयां इसे राजनैतिक घोषणाएं कह रही ळैं लेकिन वास्तविकता में यह चुनावी साल ना होने के बजाए आदर्श राज्य की तस्वीर पेश करने वाली योजनाएं हैं जिनके माध्यम से हर गांव की कुंडली के साथ विकास याजनाएं आम जन के बीच प्रस्तुत हो सकेगी। मुख्यमंत्री डा.  निशंक का अगला पड़ाव प्रदेश की युवा शकित माने जाने वाली युवा पीड़ी के बीच होगा जिसमें युवाओ को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री जीन्स और टीशर्ट मे छात्रों को छात्रवृति बांटते नजर आयेंगें कुल मिलाकर प्रदेश के सीएम का कलेवर जल्द ही जनता को बदला हुआ नजर आयेगा।