देहरादून। पत्रकारिता का चैथा स्तम्भ दूसरो को आइना दिखाने की कोषिष लेकिन खुद आपसी लड़ाई के चलते वर्शो से खन्डर में तब्दील प्रैस क्लब की दुर्दषा बयां कर रही है कि मीडिया की हकीकत किसी से छुपी नहीं। दूसरो को आइना दिखाने की नसीहत देने वालो को खुद खन्डर में तब्दील हो चुका देहरादून का उत्तरांचल प्रैस क्लब अपनी कहानी खुद ही बयां कर रहा है। देषभर के विभिन्न राज्यो में प्रैस क्लब मीडिया के लिए जहां सषक्त माध्यम होता है वहीं सुख दुख की बातो का आदान प्रदान भी इसी प्रैस क्लब के माध्यम से अपनी भूमिका निभाकर पत्रकारो के बीच सेतु का काम करता है लेकिन उत्तराखण्ड के देहरादून में स्थित प्रैस क्लब को वर्चस्व की लड़ाई ने खन्डर में तब्दील कर दिया है और देष का पहला प्रैस क्बल देहरादून में मौजूद है जो खन्डर में तब्दील होता दिख रहा है। षायद ही देष के किसी अन्य राज्य में प्रैस क्लब विवादित होने के बाद बन्द हुआ हो। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जिस प्रैस क्लब में रोजाना सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक गतिविधियो के साथ पत्रकारो की आवाज को बुलन्द करने की सषक्त पहल की गई थी आज वो खुद अपनी बर्बादी पर खन्डर के रूप में मौजूद होकर अपनी कहानी को बयां कर रहा है। पत्रकारो के देहरादून में एकमात्र प्रैस क्लब की दुर्दषा के लिए कौन जिम्मेदार हैं इसका आत्म मंथन उन्हें स्वयं करना होगा जो पत्रकारिता को एक मिसाल के तौर पर कायम कर अपना सिक्का षासन प्रषासन में होने का डंका बजाते हैं लेकिन उनका यह डंका उन्ही के प्रैस क्लब ना खुल पाने पर हकीकत को भी बयां कर देता है और मीडिया की कुंद होती धार को हकीकत के रूप् में सामने ला देता है। उत्तरांचल प्रैस क्लब परेड के पास स्थित उस समय विवादित हो गया था जब प्रैस क्लब के तत्कालीन अध्यक्ष योगेष भट्ट के खिलाफ समूचे बोर्ड ने मोर्चा खोल दिया था जिसके बाद पत्रकारो की कई यूनियनो के नेताओ ने इस मामले को सुलह कराने के कई प्रयास किए लेकिन मामला कोर्ट में चले जाने के कारण प्रषासन को मजबूरन अपनी सरकारी सील प्रैस क्लब में लगाने पर मजबूर होना पड़ा जिसके बाद से प्रैस क्लब सरकारी सील में ही अपनी विरासत को जो वहां मेहनत से जोड़ी गई थी दम तोड़ता नजर आया लेकिन किसी भी पत्रकारो के संगठन ने प्रैस क्लब को खुलवाने के कलिए अपनी कोषिष जारी नही रखी, षायद यहां भी अहम की लड़ाई आड़े आई और दूसरो के सामने षेख चिल्ली बनने वाले पत्रकारो की जमात के नेता प्रैस क्लब को खुलवाने के लिए अपनी ताकत का एहसास कराने में नाकामयाब साबित हुए जिसका नतीजा यह रहा कि कई सालो से बंद पड़ा प्रैस क्लब अपनी विरासत को दीमक की तरह चट करता नजर आया और यहां स्थापित स्व0 हेमवती नंदन बहुगुणा का पुस्तकालय भी पूरी तरह खंडर में तब्दील हो गया और प्रैस क्लब की एकमात्र कैन्टीन जो उज्जवल रैस्टोरैन्ट के नाम से स्थापित थी उस पर भी कब्जा जमा लिया गया जो आज तक बरकरार है। प्रैस क्लब में पत्रकारो की आपसी लड़ाई का फज्ञयदा षासन प्रषासन के अधिकारियो ने भी जमकर उठाया और इसीलिए प्रैस क्लब को खोले जाने के प्रयास अधिकारियो की तरफ से भी नही किए गए। अब चर्चा एक बार फिर षुरू हुई है कि प्रैस क्लब को खुलवाया जाना चाहिए। इसके लिए बकायदा पत्रकारो के सभी संगठन बंद हुए प्रैस क्लब को खुलवाने के लिए हामी भरते नजर आ रहे हैं और बीते दिनो प्रैस क्लब को खुलवाने की मुहिम पत्रकारो के एक यूनियन के नेताओ ने भी षुरू की जिसके सकारात्मक प्रषस प्रभावी रहे तो जल्द ही खंडर में तब्दील हो चुका प्रैस क्लब फिर से गुलजार नजर आएगा। बताया जा रहा प्रैस क्लब की इस बेषकीमती जमीन पर सरकार की नजर भी लगातार बनी हुई है और इस जगह पर काॅम्प्लैक्स बनाने की रणनीति को भी अंजाम दिया जा रहा है। समय रहते यदि पत्रकारो के संगठनो ने खंडर में तब्दील हो चुके प्रैस क्लब को नहीं खुलवाया तो उनके हाथ से प्रैस क्लब की जमीन भी जाती हुई दिख जाएगी।
suraaj ki or
Sunday, October 13, 2013
Monday, August 12, 2013
मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात कौन है यौन उत्पीड़न का आरोपी अधिकारी।
देहरादून। उत्तराखण्ड में सैक्स स्कैंडल के साथ राजनैतिक नेताओ की परिपाटी भी राजनीति के चष्मे से झलकती हुई दिखी है वहीं इसके चलते राज्य का नाम देष के अन्य राज्यो में भी बदनाम हुआ है इस बदनामी का कारण उत्तराखण्ड के ऐसे राजनेता रहे जिन्होने विकास के पायदानो पर उत्तराखण्ड को आगे बड़ाने का काम किया लेकिन साथ ही सैक्स स्कैंडल जैसे मामलो में उत्तराखण्ड की छवि को भी बदनाम कर डाला जिसके चलते उनका राजनैतिक कैरियर तो चैपट हुआ ही उत्तराखण्ड के राजनेताओ को भी उसी चष्मे से देखा जाने लगा। राज्य में यौन उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आते जा रहे ळें और इन मामलो में पुलिस, राजनेता और अब षासनस्तर के अधिकारियो की सन्लिप्तता भी सामने आ गई है जिससे साबित हो गया ळै कि उत्तराखण्ड में ऐसे मामले अब षासन का केन्द्र बिन्दु बनते जा रहे ळैं। उत्तराखण्ड के कई राजनेताओ पर यौन उत्पीड़न के मामले देष की सुर्खियां बनते रहे और कांग्रेस के तिवारी षासनकाल में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को जैनी कांड के चलते मंत्री पद से भी इस्तीफा देना पड़ा लेकिन बाद में मामले का पटाक्षेप होने के बाद हरक सिंह का दामन साफ हो सका लेकिन कई सालो तक हरक सिंह इस कांड के चलते अपना राजनैतिक कैरियर तबाह कर बैठे इसके बाद हैदराबाद में हुए एनडी तिवारी के सैक्स स्कैंडल ने तिवारी को राज्यपाल के पद से विदा कर दिया और राजनैतिक कैरियर भी तिवारी का कांग्रेस में तबाह हो गया तबसे लेकर आज तक तिवारी अपना राजनैतिक कैरियर षुरू नही कर पाए हैं लेकिन अब षासन के अधिकारियो पर सैक्ैस स्कैंडल के आरोप सामने आए हैं और सचिवालय में तैनात समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात एक महिला ने मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात दो अधिकारियो पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर खलबली मचा दी है। सचिवालय के भीतर इस तरह की बात आना कोई बड़ी बात नहीं और समय समय पर ऐसी बातें पूर्व में भी उजागर होती रही हैं लेकिन वर्तमान में उत्तराखण्ड सरकार के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यालय में तैनात इन अधिकारियो पर आरोप लगने के बाद षासन की कार्यवाही तेज हो गई है, खुद मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इस मामले की षिकायत सामने आने के बाद इसकी जांच के आदेष दिए हैं। महिला उत्पीड़न के मामले पर सुप्रीम र्कोअ के दिषा निर्देष के अनुरूप् राज्य स्तर पर प्रमुख सचिव को इसकी जिम्मेदारी दी गई है और वर्तमान में प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी इस मामले की जांच कर रही हैं लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय के अंदर यदि काम करने वाली महिला सुरक्षित नही तो ऐसे में उत्तराखण्ड के अंदर महिलाओ की सुरक्षा कैसी होगी इसका आंकलन भी सरकार को खुद करना होगा। मुख्यमंत्री का कार्यालय ही जब महिलाओ के लिए सुरक्षित नही तो ऐसे में प्रदेष के अंदर मौजूद महिलाओ की स्थिति जिलो और गांवो में किस कदर होगी इसका आंकलन भी राजनैतिक चष्मे से किया जाना बेहद जरूरी है। हमेषा से ही राजनेताओ का दामन यौन उत्पीड़न के मामले पर दागदार होता रहा है लेकिन यह पहला मौका है जब उत्तराखण्ड सरकादके मुख्यमंत्री कार्यालय में यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है हाला िकइस मामले में उत्पीड़न का षिकार हुइ महिला ने मुख्यमंत्री को षिकायत की ळै लेकिन अभी तक महिला द्वारा पुलिस को षिकायत ना किए जाने का कारण भी सामने नही आ पाया है। बताया जा रहा है कि जिस अधिकारी पर उत्पीड़ का आरोप लगा है उसमे से एक अधिकारी जून माह में रिटायर हो गया है जबकि एक अन्य अभी भी मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात है। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री के कार्यालय में तैनात एक बड़े अधिकारी का नाम भी इस मामले में सामने आ रहा हैलेकिन उसे बचाने की हर सम्भव कोषिष की जा रही ळै क्योकि इस अधिकारी के आधीन आने वाले एक विभाग में महिलाओ की तैनाती सबसे ज्यादा की गई है जिसकी जांच की जानी भी बेहद जरूरी है वहीं इस अधिकारी के बारे में आम चर्चा है कि इसका चरित्र हमेषा से ही चर्चित रहा है।
Thursday, August 8, 2013
अंधेर नगरी, चैपट राजा, पुलिस थानो में फर्जी मुकदमे दर्ज करा जा।
Thursday, August 1, 2013
कप्तान साहब प्रेमनगर क्षेत्र में किसके इषारे पर चलता है सट्टा, षराब और नषे का कारोबार.....??
देहरादून। प्रेमनगर क्षेत्र में नषे, सट्टे और षराब का वो कौन कारोबारी है जिसके इषारे पर क्षेत्र में यह धन्धा फल फूल रहा है और पिछले कई महीनो में जितने भी चैकी इन्चार्ज व थानेदार तैनात रहे हैं वो कार्यवाही क्यो नही कर पाए। निष्चित रूप से यह सवाल इसलिए उठाया जा रहा है कि देहरादून के पुलिस कप्तान केवल खुराना को इमानदार पुलिस अफसर के रूप् में इसलिए जाना जाता है कि वह काफी इमानदार लोगो की कतार में खड़े नजर आते है लेकिन पुलिस कप्तान को प्रेमनगर क्षेत्र में पूरी पुलिस चैकी केा लाइन हाजिर क्यो करना पड़ा यह भी बड़ा सवाल देहरादून की जनता जनपद के पुलिस कप्तान से पूछती हुई नजर आ रही है। पुलिस कप्तान ने प्रेमनगर क्षेत्र में जाम लगने के कारण चैकी इन्चार्ज सहित पूरी चैकी को लाइन हाजिर कर दिया लेकिन क्या इसके बाद महकमा ऐसी घटनाएं रोक पाने में कामयाब हो जाएगा इस सवाल का जवाब आने वाले समय में जरूर मिलेगा लेकिन दोपहर के समय राजपुर रोड के घन्टाघर इलाके में लम्बा जाम लग जाता है और धारा चैकी इन्चार्ज जाम को दुरूस्त कर पाने में नाकामयाब साबित होते हैं लेकिन जनपद के पुलिस कप्तान को यह बात भी समझनी होगी कि प्रेमनगर क्षेत्र में सहसपुर जाने के दौरान जाम की जो हालत देखी गई उसी तर्ज पर धाराचैकी क्षेत्र में भी जाम का आंकलन खुद करें और अगर यह बात सच साबित होती है तो खुद ही तय करें कि क्या चैकी इन्चार्ज इसके लिए दोशी नहीं। बड़ सवाल यह भी उठ रहा है कि जनपद देहरादून की पुलिसिंग को लेकर जैसे दावे कप्तान केवल खुराना ने तैनाती के बाद किए थे अब उन दावो की हवा निकलती दिख रही है। सबसे पहले देहरादून की यातायात व्यवस्था को ठीक करने की वाहवाही लूटने वाले कप्तान को प्रेमनगर में जाम लगने के बाद इस हकीकत को बयां कर दिया कि अभी भी देहरादून की यातायात व्यवस्था पटरी पर नही आई है लेकिन मीडिया के कुछ लोगो द्वारा यातायात व्यवस्था को लेकर षुरूआती दौर में ऐसा बवंडर मचाया कि सड़को पर यातायात दिखता हुआ नजर नही आया लेकिन अब पंचायती मंदिर, घन्टाघर सहित कई जगहो पर जाम की बुरी हालत से फिर जनता को दो चार होना पड़ रहा है। इसके अलावा एक बड़ा सवाल देहरादून जनपद के पुलिस कप्तान से कि क्या वो ऐसे थानेदारो व चैकी इन्चार्जो के खिलाफ कार्यवाही करेंगें जो पुलिस की साख को बट्ट्ा लगाने का काम कर रहे हैं और पुलिस के मनोबल को खुद तोड़ रहे हैं। पुलिस के सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में देहरादून के पुलिस कप्तान की कार्यषैली से कई लोग परेषान नजर आ रहे हैं और उनका साफ मानना है कि देहरादून की पुलिसिंग अब पूरी तरह बदल गई है और थाने चैकियो की बजाए पुलिस लाइन में ही बेहतर नौकरी की जा सकती है इसके साथ्ी ही देहरादून के ऐसे पुलिसकर्मी जिनका एक दिन का वेतन पूर्व में काटा गया है वो भी ये सवाल पुलिस विभाग से नाम ना छापने की षर्त पर पूछ रहे हैं कि क्या एक दिन का वेतन काटे जाने का अधिकार जनपद के पुलिस कप्तान को है लेकिन पुलिस व्यवस्था को सुधारने के लिए हर किसी को खुद पहल करनी होगी और इमानदारी से काम कर ऐसे लोगो को जेल भेजना होगा जो वास्तविक रूप से अपराधो के लिए दोशी हैं। पिछले एक सप्ताह से लगातार जनपद देहरादून के अंदर पुलिस को कितनी षिकयतें मिली और उन पर क्या कर्यवाही हुइ इसका जवाब भी पद पुलिस के कप्तान के पास मौजूद नहीं क्योकि पिछले चार दिनो से लगातार जनपद के पुलिस कप्तान फोन उठाना तो दूर बात करने की जहमत भी नही उठा रहे, उनके मोबाइल फोन को कभी उनका गनर तो कभी उनके आॅफिस से पीआरओ फोन कर जानकारी हासिल कर लेता है लेकिन खबर के बारे में कोई भी यह बताने से बचता है कि आखिर देहरादून जिले में कितने षिकायती पत्रो पर क्या कार्यवाही हुई। अब देखना होगा कि क्या जनपद का पुलिस कप्तान पिछले एक सप्ताह के भीतर आई षिकायती पत्रो पर क्या कार्यवाही करते ळैं और षिकायत दर्ज ना करने वाले थाने व चैकी इन्चार्जाे को क्या सजा देते ळैं।
Wednesday, July 31, 2013
अल्मोड़ा के एसडीएम अजय अरोड़ा मंदाकिनी के तेज बहाव में बह गए
बागेश्वर की कपकोट तहसील में बादल फटने से आए उफान में बहने से चार लोगों मौत हो गई। खाईबगड गांव में भारी नुकसान हुआ। यहां दो मकान बह गए। इनमें से एक मकान में परिवार के ये चारों सदस्य सो रहे थे। उनका कोई पता नहीं लग पाया। रात लगभग 12 बजे सल्ट विकास खंड मुख्यालय में भी बादल फटने से एक गांव में दो बरसाती नाले ऊंची पहाड़ी बहाकर ले आए। यहां पांच मकान जमींदोज हो गए, छह लोग घायल हुए हैं। देहरादून में कच्चे मकाने के मलबे में दबने से चार की मौत हो गई और तीन गंभीर रूप से घायल हो गए। चमोली के नारायणबगड़ और घाट ब्लाक में तीन पैदल पुल और पैदल मार्ग बह गए। उत्तरकाशी में भी बारिश से कई गांवों में भारी नुकसान हुआ है। पांच मकान जमींदोज हो गए, जबकि दो दर्जन से ज्यादा आवासीय भवनों में पानी और मलबा घुस गया। केदारनाथ में बारिश तो नहीं हुई, लेकिन खराब मौसम के कारण राहत एवं मंदिर परिसर में सफाई कार्य दोपहर बाद शुरू हुआ। गुप्तकाशी से सेना के हेलीकाप्टर के जरिये केदारनाथ में मलबा और बोल्डर हटाने के लिए कुछ भारी उपकरण भी पहुंचाए गए।
Monday, July 29, 2013
20 साल बाद दाऊद के खिलाफ चार्जशीट
नई दिल्ली। आईपीएल-6 में फिक्सिंग के दौरान सबसे ज्यादा फायदा डॉन दाऊद इब्राहिम को होता था। फिक्सिंग में सबसे ज्यादा रकम उसे ही जाती थी। दाऊद को ये पता होता था कि किस मैच का क्या नतीजा होगा।दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार्जशीट में इस बात को रखा है। स्पेशल सेल आईपीएल फिक्सिंग मामले में मंगलवार को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकती है। बताया जा रहा है कि चार्जशीट में आरोपियों पर से अमानत में खयानत (409) की धारा हटा ली गई है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने चार्जशीट में दाऊद के नाम का जिक्र कॉलम-एक में किया है। पुलिस ने चार्जशीट में आईपीएल के माहौल के बारे में लिखा है। उसके अनुसार, आईपीएल के दौरान होटल में चेकिंग को कोई सिस्टम नहीं है। कोई भी क्रिकेटर से आसानी से मिल सकता है। पुलिस ने चार्जशीट में इस बात का भी जिक्र किया है कि क्रिकेटर फिक्सरों के चुंगल में कैसे फंस जाते हैं।
पुलिस के अनुसार, आईपीएल में क्रिकेटर देश के लिए नहीं बल्कि क्लब के लिए खेलते हैं और क्लब का मालिकान भी गड़बड़ था। कई क्लब के मालिक फिक्सिंग व सट्टेबाजी में लगे रहते हैं। पुलिस चार्जशीट के साथ उन आईपीएल मैचों की सीडी भी कोर्ट को देने जा रही है, जिनमें फिक्सिंग हुई है। इसके अलावा खिलाड़ी व क्रिकेटरों की आवाज के सैंपल और सीएसएफएल की आवाज के सैंपलों की रिपोर्ट भी कोर्ट में जमा करवाई जा रही है। दिल्ली पुलिस ने 35 लोगों को आरोपी बनाया है।दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 1993 में मुंबई में सीरियल बम धमाके मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊ द के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी। उसके बाद अब दाऊ द के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होगी।
Sunday, July 28, 2013
हुड्डा की राजनैतिक कब्र खोदने में जुटे वीरेन्द्र सिंह।
उत्तराखण्ड मुख्यमंत्री की कुर्सी पर षतरंज की चली थी बेतुकी चाल।
हरियाणा। हुड्डा की राजनैतिक कब्र खोदने के लिए उत्तराखण्ड के पूर्व प्रदेष प्रभारी व कांग्रेसी सांसद वीरेन्द्र सिंह ने कांग्रेस में कुर्सी बिना लाभ के नही मिल पाती कहकर सनसनी फैला दी है। उनके इस बयान के बाद हरियाणा की राजनीति से लेकर दिल्ली तक भूचला आ गया ळै इस भूचाल की जद में उत्तराखण्ड की राजनीति भी गोते खाती हुई नजर आ रही है क्योकि चैधरी वीरेन्द्र सिंह केन्द्रीय रेल मंत्री बनने की लिस्ट में सबसे उपर थे और उनके नाम का एलान लगभग हो चुका था लेकिन एंड टाइम में उनका नाम राजनैतिक विरोधियो द्वारा हटा दिया गया। ऐसी ही घटनाक्रम उत्तराखण्ड में उस वक्त देखने को मिला था जब मुख्यमंत्री के लिए फैसला किया जा रहा था तब भी मुख्यमंत्री का असल दावेदार यषपाल आर्य को माना जा रहा था लेकिन यषपाल को राजनैतिक बिसात पर चारो खाने चित्त कर चैधरी वीरेन्द्र सिंह ने बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनवा डाला था। जिसके बाद से मुख्यमंत्री का लगातार विरोध आज तक जारी है लेकिन यषपाल आर्य अभी भी बहुगुणा के सारथी बने हुए ळैं। उत्तराखण्ड के पूर्व प्रदेष प्रभारी चैधरी वीरेन्द्र सिंह का यह बयान कि कांग्रेस में कुर्सी बिना लाभ के नही मिलती कई तरह की षंकाओ को जन्म दे रहा ळै। उनका यह दर्द ऐसे समय में उजागर हुआ ळै जब देष के अंदर 2014 की रणनीति के साथ कांग्रेस मोदी के खौफ से बेचैन नजर आ रही है। आगामी 20 अगस्त को हरियाणा में सोनिया गांधी का रैली के माध्यम से कार्यक्रम निर्धारित है और हरियाणा की राजनीति में हुड्डा व चैघरी के बीच हमेषा से ही 36 का आंकड़ा रहा है और अब अपनी राजनैतिक जमीन को बचाने के लिए चैघरी हरियाणा की रैली में अपनी ताकत का एहसास सोनिया गांधी को कराना चाहते हें और षायद इसी कारण से उन्होने ऐसे समय में उस बयान को हवा दी है जो कांग्रेस के लिए बेहद खतरनाक माना जा रहा है। चैघरी की हरियाणा से राजनैतिक जमीन को बंजर करने के लिए हुड्डा ने भी कोई कसर नही छोड़ी थी और तबसे लेकर आज तक हरियाणा की राजनैतिक जमीन पर चैधरी अपनी फसल लहराने में कामयाब नही हो पाए थे लेकिन अब चैधरी उत्तराखण्ड और दिल्ली की सियासत को इलविदा कहकर हरियाणा में अपना राजनैतिक ग्राफ बड़ाने में जुट गए हैं लेकिन उत्तराखण्ड में राजनैतिक बिसात की जिस षतरंज को उन्होने खेला था अब वहीं षतरंज उनकी राजनैतिक जमीन पर खेली जा रही है।
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